Indian Defence News : HAL के HAPS Program को सरकार से मिली मंजूरी

Indian Defence News : हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) देश की रक्षा ज़रूरतों को पूरा करने में हमेशा ही आगे रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी के लिए अभी हाल ही में एक और गुड न्यूज़ आई है।


HAL HAPS


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार HAL को 'स्वदेशी हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट (HAPS)' को Develop करने की अनुमति सरकार द्वारा दी जा चुकी है। इस बात की पुष्टि रक्षा सचिव अजय कुमार द्वारा की गई है। HAPS को कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम 'Combat Air Teaming System' के हिस्से के रूप में अप्रूवल दिया गया है।


HAPS क्या है?


HAPS का फुल फ़ॉर्म - "स्वदेशी हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट" होता है। Aero India 2021 के दौरान HAL ने NAL और न्यूज़स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलोजीज कंपनी के साथ गठजोड़ करके "Indigenous High Altitude Pseudo-Satellite (HAPS)" को Develop करने की मंशा व्यक्त की थी और इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था।


सरकार को प्रस्ताव भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार HAL पहले 'एक स्केल्ड प्रोटोटाइप विकसित करेगा'। यह प्रोटोटाइप 3-4 साल में तैयार हो जाएगा और इस काम के लिए 50 करोड़ की प्रारंभिक पूजी की ज़रूरत पड़ सकती है।


हाल ही में जानकारी सामने आई थी कि HAPS का स्केल्ड प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए HAL पहले ही हल्के इलेक्ट्रिक मोटरों का परीक्षण शुरू कर चुका है। यह हल्के इलेक्ट्रिक मोटर हाई-डेंसिटी रिचार्जेबल लिथियम-सल्फर बैटरियों द्वारा संचालित होंगे।


HAPS के इस स्केल्ड प्रोटोटाइप में दी गई रिचार्जेबल लिथियम-सल्फर बैटरियों की ख़ास बात ये है कि इनको दिन के समय सौर पैनलों का उपयोग करके चार्ज किया जाएगा और रात में ये बैटरी से संचालित होंगे।


सोलर पैनल और बैटरी की इसी विविधता की वजह से ये HAPS एक बार उड़ान भरने के बाद बिना लैंडिंग किए 2-3 महीने तक हवा में ही रह कर अपना काम कर सकता हैं।


Indigenous High Altitude Pseudo-Satellite की विशेषताएँ


  • HAPS परियोजना की कुल निवेश लागत लगभग 700 करोड़ हो सकती है।

  • HAPS का वजन 500 किलोग्राम से अधिक होगा।

  • यह 70,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होगा।

  • यह लगभग 70,000 फीट ऊपर उड़ान भरेगा।


इसमें लगाए जाने वाले पेलोड कौन-कौन से हो सकते हैं?


HAL द्वारा विकसित किए जा रहे Indigenous High Altitude Pseudo-Satellite (HAPS) में निम्न पेलोड शामिल हो सकते हैं :-

  • Electro-Optical (इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल)

  • Infrared (इन्फ्रारेड)

  • Hyperspectral (हाइपरस्पेक्ट्रल)

  • RF Radar - Passive Radio Frequency Radar (पैसिव रेडियो फ्रीक्वेंसी रडार)

  • SA Radar - Synthetic Aperture Radar (सिंथेटिक एपर्चर रडार)

  • Early Warning System

  • Lidar

  • Automatic Identification System (AIS)


HAPS के 70000 फीट ऊपर उड़ान भरने से होने वाले फ़ायदे


  • इतनी ऊँचाई पर उड़ान भरने से बियॉन्ड लाइन ऑफ साइट (BLOS) क्षमताएं प्रदान की जा सकती है।

  • बदलते मौसम से सुरक्षित रहेगा। 

  • पारंपरिक हवाई यातायात के मार्ग से ऊपर रहेगा, इससे किसी जहाज़ के साथ टक्कर की संभावना ख़त्म हो जाएगी।

  • ऊँचाई पर उड़ान भरने से सेना की मिशन की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।

  • उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेज और वीडियो कैप्चर कर सकता है, जो सेना और सरकार के लिए उपयोगी साबित होंगी।

  • खुफिया जानकारी जुटा सकता है।


@ Indian Defence News - HAL's HAPS Program Approved.